34 साल लग जाते हैं ये बताने में कि कौन गुनहगार है कौन नहीं. 34 साल पहले के ज़ख्म पर कोर्ट ने अब 34 साल बाद मरहम रखा है. 34 साल बाद सज्जन कुमार को उम्र कैद मिली है. जब भी इस देश में दंगे का ज़िक्र आता है तो याद आता है 31 अक्तूबर.
इस मुल्क की तारीख में 31 अक्तूबर 1984 की याद आज भी हर हिंदुस्तानी को सहमा जाती है. पिछले 34 बरसों में बहुत सारी चीजें बदल गईं. बस नहीं बदली तो इस तारीख की टीस. आंसुओं और आंहों में लिपटी 31 अक्तूबर 1984 की वो मज़लूम चीखें आज भी दिल्ली की कई बस्तियों, मोहल्लों और गलियों में गूंजती हैं.
31 अक्तूबर 1984. ये महज़ एक तारीख नहीं है. बल्कि ये मुल्क के माथे पर लगा वो बदनुमा दाग है जो शायद वक्त भी ना धो पाए. ये तारीख सिर्फ इंदिरा गांधी की हत्या की तारीख बनकर रह सकती थी. लेकिन कुछ सियासी रहनुमाओं को शायद ये गवारा ना था.
और इसीलिए उन्होंने इस तारीख के साथ जो खूनी खेल खेला, उससे दिल्ली की गलियों में जिंदगी खुद पनाह मांगने लगी. उस शाम भी दिल्ली की गलियों में सूरज डूबा था. लेकिन अपने पीछे वैसा अंधेरा छोड़ कर उससे पहले कभी नहीं गया था.
पिछले सप्ताह ऐसी रही बाजार की चाल
इससे पहले शुक्रवार को सेंसेक्स 35 अंक बढ़त के साथ 35,963 पर और निफ्टी 14 की तेजी के साथ 10, 805 पर बंद हुआ. वहीं गुरुवार को सेंसेक्स 150.57 अंकों की बढ़त के साथ 35,929.64 पर और निफ्टी 53.95 अंकों की तेजी के साथ 10,791.55 पर बंद हुआ. अगर बुधवार की बात करें तो प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स करीब 629 अंक की मजबूती के साथ 35779 के स्तर पर बंद हुआ तो निफ्टी 188 अंक उछलकर 10737 के स्तर पर रहा.
जबकि मंगलवार को सेंसेक्स 190 अंकों की बढ़त के साथ 35,150 के स्तर पर बंद हुआ तो निफ्टी करीब 61 अंक बढ़कर 10,550 के स्तर पर आ गया. हालांकि सोमवार को सेंसेक्स 713.53 अंक यानी 2 फीसदी टूटकर 34,959.72 के स्तर पर बंद हुआ था जबकि निफ्टी 205.25 अंक यानी 1.92 फीसदी टूटकर क्रमशः 10,488.45 के स्तर पर रहा.
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